चोरी चोरी माखन खाय गयो रे – भजन लिरिक्स

चोरी चोरी माखन खाय गयो रे – भजन लिरिक्स

“चोरी चोरी माखन खाय गयो रे” एक लोकप्रिय भक्तिमय भजन है, जो बाल गोपाल (बालकृष्ण) की माखन चोरी की मोहक लीला का सुंदर वर्णन करता है। यह भजन भगवान श्रीकृष्ण की नटखट शरारतों, उनके माखन चोर रूप और गोकुलवासियों के उनके प्रति अपार स्नेह को जीवंत रूप से प्रस्तुत करता है। यह केवल कृष्ण की बालसुलभ चंचलता को ही नहीं दर्शाता, बल्कि उनकी दिव्य महिमा और भक्तों के गहरे प्रेम को भी प्रकट करता है।

यह भजन श्रीकृष्ण की मासूमियत और बालसुलभ आकर्षण को दर्शाता है, जो भक्तों को उनकी लीलाओं के आनंद में डुबो देता है। जब ग्वाल बाल और माता यशोदा शिकायत करते हैं कि कृष्ण चोरी-छिपे माखन खा जाते हैं, तब यह भजन उनकी प्यारी शरारतों को प्रेम और मासूमियत के साथ उजागर करता है। किंतु यह माखन चोरी केवल एक शरारत नहीं है—यह आत्मा और परमात्मा के बीच के दिव्य प्रेम का प्रतीक है। वास्तव में, श्रीकृष्ण अपने भक्तों के हृदय से निष्कलुष प्रेम चुरा लेते हैं और उन्हें भक्ति के अमृत में डुबो देते हैं।

यह भजन केवल कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन नहीं है, बल्कि उनके और भक्तों के बीच के प्रेमपूर्ण संबंध और भक्ति मार्ग का भी सुंदर प्रतिबिंब है। यहाँ माखन शुद्ध प्रेम और निःस्वार्थ भक्ति का प्रतीक है, जिसे श्रीकृष्ण अपने भक्तों के हृदय से प्रेमपूर्वक स्वीकार कर लेते हैं। यह भजन गहरा संदेश देता है कि भगवान श्रीकृष्ण को केवल प्रेम और भक्ति से ही प्राप्त किया जा सकता है।

मंदिरों, सत्संगों और कीर्तनों में श्रद्धा के साथ गाया जाने वाला यह भजन अपनी मधुर धुन और सरल किंतु भावपूर्ण शब्दों से भक्तों के हृदय को मोह लेता है। जैसे ही यह भजन सुनाई देता है, मन में नन्हे कृष्ण की छवि सजीव हो उठती है—जो अपने सखाओं के साथ आनंदपूर्वक माखन चुराते हैं और अपनी नटखट लीलाओं से सभी को आनंदित कर देते हैं।

आइए, इस मधुर भजन की रसधारा में डूब जाएँ और श्रीकृष्ण की भक्ति में रमकर उनके दिव्य प्रेम और करुणा का अनुभव करें।

लिरिक्स – चोरी चोरी माखन खाय गयो रे

चोरी चोरी माखन खाय गयो रे, वो तो छोरो ग्वाल को। (४)

मैंने उसे पूछा के नाम तेरा क्या है, (३)
कृष्णा कन्हैया बताई गयो रे, वो तो छोरो ग्वाल को। (२)

मैंने उसे पूछा के गाँव तेरा क्या है, (३)
गोकुल मथुरा बताए गयो रे, वो तो छोरो ग्वाल को। (२)

मैंने उसे पूछा माँ बाप तेरे कौन है, (३)
नन्द यशोदा बताए गयो रे, वो तो छोरो ग्वाल को। (२)

मैंने उसे पूछा के खाना तेरा क्या है, (३)
माखन मिश्री बताए गयो रे, वो तो छोरो ग्वाल को। (२)

मैंने उसे पूछा श्रृंगार तेरा क्या है, (३)
मोतियन की माला बताए गयो रे, वो तो छोरो ग्वाल को। (२)

मैंने उसे पूछा के काम तेरा क्या है, (३)
गैया चराना बताई गयो रे, वो तो छोरो ग्वाल को। (२)

मैंने उसे पूछा के प्यारी तेरी कौन है, (३)
राधा रानी जी बताई गयो रे, वो तो छोरो ग्वाल को। (२)