
“शंभु शरणे पड़ी” एक अत्यंत लोकप्रिय और भक्तिपूर्ण गुजराती भजन है, जिसमें भगवान शिव की कृपा, करुणा और उनके चरणों में शरण लेने वाले भक्तों को मिलने वाले आशीर्वादों का सुंदर वर्णन मिलता है। यह भजन शिव भक्तों के हृदय में गहरी भक्ति और विश्वास भर देता है और उन्हें आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।
इस भजन में भक्त भगवान शंकर से शरण मांगता है और उनकी दिव्य कृपा की प्रार्थना करता है। शिव, जिन्हें “भोलानाथ” कहा जाता है, अपने भक्तों पर असीम प्रेम और दया बरसाते हैं। “शंभु शरणे पड़ी” का अर्थ है भगवान शंभु (शिव) के चरणों में पूर्ण समर्पण कर देना और जीवन की सभी परेशानियाँ, दुख और चिंताएँ उनके सुपुर्द कर देना। यह भजन प्रेरणा देता है कि इंसान सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर भगवान शिव के दिव्य स्वरूप में लीन हो जाए।
“शंभु शरणे पड़ी” भगवान शिव के प्रति अटूट प्रेम और भक्ति को व्यक्त करता है। इसके शब्द हृदय को छू जाते हैं और भक्त के मन में दिव्य अनुभव उत्पन्न करते हैं। जब भक्त सच्चे मन से शिव की शरण में जाता है, तो वे उसके सभी कष्ट दूर कर उसे मोक्ष के मार्ग की ओर ले जाते हैं। यह भजन सिखाता है कि सांसारिक संघर्षों से ऊपर उठने का सबसे सुंदर और सरल मार्ग भगवान शिव की निरंतर भक्ति है।
यह भजन हमें स्मरण कराता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ, यदि हम भगवान शिव की शरण में जाएँ, तो वे सदैव हमारी रक्षा करेंगे और सही मार्ग दिखाएँगे।
ॐ नमः शिवाय! हर हर महादेव!
शंभु शरणे पड़ी भजन लिरिक्स
शंभु शरणे पड़ी, मागूँ घड़ी रे घड़ी कष्ट कापो..
दया करी दर्शन शिव आपो…
शंभु शरणे पड़ी, मागूँ घड़ी रे घड़ी कष्ट कापो..
दया करी दर्शन शिव आपो…दया करी दर्शन शिव आपो…
तमे भक्तोना दुःख हरनारा, शुभ सौणु सदा करनारा..
तमे भक्तोना दुःख हरनारा, शुभ सौणु सदा करनारा..
हूँ तो मंद मति, तारी अकल गति, कष्ट कापो…
दया करी दर्शन शिव आपो…दया करी दर्शन शिव आपो…
अंगे भस्म स्मशाननी चोळी, संगे राखो सदा भूत टोळी..
अंगे भस्म स्मशाननी चोळी, संगे राखो सदा भूत टोळी..
भाले तिलक कर्यूं, कंठे विष धर्यूं, अमृत आपो…
दया करी दर्शन शिव आपो…दया करी दर्शन शिव आपो…
नेति नेति ज्याँ वेद वदे छे, मारूं चितडूं त्यां जावा चाहे छे..
नेति नेति ज्याँ वेद वदे छे, मारूं चितडूं त्यां जावा चाहे छे..
सारा जगमा छे तूं, वसूं तारामां हूं, शक्ति आपो…
दया करी दर्शन शिव आपो…दया करी दर्शन शिव आपो…
हूं तो एकलपंथि प्रवासी, छતાં आतम केम उदासी..
हूं तो एकलपंथि प्रवासी, छતાં आतम केम उदासी..
थाक्यो मथि रे मथि, कारण मळतूं नथी, समजन आपो…
दया करी दर्शन शिव आपो…दया करी दर्शन शिव आपो…
आपो दृष्टिमां तेज अनोखूं, सारी सृष्टिमां शिवरुप देखूं..
आपो दृष्टिमां तेज अनोखूं, सारी सृष्टिमां शिवरुप देखूं..
मारा मनमा वसो, हैये आवी हसो, शांति स्थापो…
दया करी दर्शन शिव आपो…दया करी दर्शन शिव आपो…
भोला शंकर भवदुःख कापो, नित्य सेनौ शुभ फल आपो..
भोला शंकर भवदुःख कापो, नित्य सेनौ शुभ फल आपो..
गालो मानव मदा, टालो गर्व सदा, भक्ति आपो…
दया करी दर्शन शिव आपो…दया करी दर्शन शिव आपो…
शंभु शरणे पड़ी, मागूँ घड़ी रे घड़ी कष्ट कापो..
दया करी दर्शन शिव आपो…दया करी दर्शन शिव आपो…


