
“आरती अति पावन पुराण की” श्रीमद् भागवत पुराण की महिमा का गुणगान करती है, जो भक्तों को धर्म, भक्ति और ज्ञान का मार्ग दिखाता है। श्री भागवत पुराण की यह आरती भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं और उनके अलौकिक गुणों की स्तुति करती है। यह आरती भागवत महापुराण की पवित्रता और आध्यात्मिक महत्व को प्रकट करती है। भागवत पुराण को सभी पुराणों में श्रेष्ठ माना गया है और इसे धर्म, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की आधारशिला कहा जाता है।
इस आरती में भागवत पुराण को जीवन के तीनों तापों—आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक—को दूर करने वाला तथा जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है। यह भगवद् भक्ति के महत्व को उजागर करता है और सांसारिक आसक्ति, भोग-विलास और अज्ञान को दूर कर आत्मज्ञान का प्रकाश फैलाता है। श्रीमद् भागवत पुराण को संतों का प्रिय और भक्तों का आधार कहा गया है, जो भक्ति, मुक्ति और प्रेम का दिव्य मार्ग दर्शाता है। यह आरती सभी भक्तों को प्रभु की महिमा गाने की प्रेरणा देती है, जिससे वे अपने जीवन में शांति, आनंद और मोक्ष का अनुभव कर सकें।
लिरिक्स – आरती अति पावन पुराण की
आरती अति पावन पुराण की,
धर्म भक्ति विज्ञान खान की
महा पुराण भागवत निर्मल,
शुक-मुख-विगलित निगम कल्प कल,
परमानंद सुधा-रसमय फल,
लीला रति यह रस निधान की,
आरती अति पावन पुराण की …
कलिमल-मथनि त्रिताप-निवारिणी,
जन्म-मृत्यु भव-भय हारिणी,
सेवत संत सकल सुख कारिणी,
शुभहौषधि हरि-चरित्र गान की,
आरती अति पावन पुराण की…
विषय विलास विमोह विनाशिनी,
विमल विराग विवेक विकासिनी,
भगवत-तत्व-रहस्य-प्रकाशिनी,
परम ज्योति परमात्म ज्ञान की,
आरती अति पावन पुराण की…
परमहंस-मुनि मन उल्लासिनी,
रसिक हृदय रस रास-विलासिनी,
भुक्ति-मुक्ति-रति-प्रेम सुदासिनी,
कथा अकिंचन-प्रिय सुजान की,
आरती अति पावन पुराण की…


