
“आरती श्री रामायण जी की” केवल रामायण की स्तुति मात्र नहीं है, बल्कि यह भक्त के हृदय में भक्ति और पवित्रता की भावना को जागृत करती है। हिंदू धर्म में शास्त्रों और उपासना का विशेष महत्व है। वेद, पुराण, गीता और रामचरितमानस जैसे महान ग्रंथ केवल ज्ञान का भंडार ही नहीं, बल्कि हमारे जीवन को सही दिशा दिखाने वाले प्रकाश स्तंभ भी हैं।
श्री रामचरितमानस और रामायण की कथा हमारे धर्म और संस्कृति का अमूल्य अंग है। इनका पाठ, श्रवण और मनन न केवल जीवन को मार्गदर्शन प्रदान करता है, बल्कि भगवान श्री राम, माता सीता और हनुमान जी के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा भी देता है। रामायण की महिमा को उजागर करने के उद्देश्य से “आरती श्री रामायण जी की” की रचना एक भक्तिमय स्तुति के रूप में की गई है।
“आरती श्री रामायण जी की” का गायन भक्त के हृदय को आनंद और श्रद्धा से भर देता है। रामायण का प्रत्येक कांड हमें धर्म, निष्ठा और कर्तव्य का पाठ पढ़ाता है। रामायण का अध्ययन और स्मरण मनुष्य के जीवन को पवित्र और पुण्यमय बनाता है। इस आरती के माध्यम से रामायण के महत्व को संक्षेप में एक भक्ति गीत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस आरती का गायन करने से भक्त भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी, भरत जी और हनुमान जी सहित सभी दिव्य शक्तियों की एक साथ आराधना कर सकता है।
लिरिक्स – आरती श्री रामायण जी की
आरती श्री रामायण जी की।
कीरति कलित ललित सिय पी की॥
गावत ब्राह्मादिक मुनि नारद।
बालमीक विज्ञान बिसारद।
शुक सनकादि शेष अरु सारद।
बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥
आरती श्री रामायण जी की।
कीरति कलित ललित सिया-पी की॥
गावत बेद पुरान अष्टदस।
छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस।
मुनि जन धन संतन को सरबस।
सार अंश सम्मत सबही की॥
आरती श्री रामायण जी की।
कीरति कलित ललित सिया-पी की॥
गावत संतत शंभु भवानी।
अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी।
व्यास आदि कविबर्ज बखानी।
कागभुशुंडि गरुड़ के ही की॥
आरती श्री रामायण जी की।
कीरति कलित ललित सिया-पी की॥
कलिमल हरनि विषय रस फीकी।
सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की।
दलन रोग भव मूरि अमी की।
तात मात सब विधि तुलसी की॥
आरती श्री रामायण जी की।
कीरति कलित ललित सिया-पी की॥


