
“हरि तारा छे हजार नाम” एक अत्यंत लोकप्रिय गुजराती भजन है, जो भगवान श्री हरि (श्रीकृष्ण) की महिमा और उनके अनगिनत दिव्य नामों के महत्व का गुणगान करता है। यह भजन यह संदेश देता है कि ईश्वर के हजारों नाम हैं और प्रत्येक नाम का स्मरण भक्त को आध्यात्मिक शांति और अंतिम मुक्ति (मोक्ष) की ओर ले जाता है।
गुजरात में भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम, भक्ति और करुणा का साकार स्वरूप माना जाता है। इस भजन के माध्यम से श्री हरि के अनेक नामों की गहन भक्ति भाव से स्तुति की जाती है, जो भक्तों के हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम और श्रद्धा जागृत करती है। “हरि तारा छे हजार नाम” यह दर्शाता है कि प्रभु के पवित्र नामों का जाप करने से सभी दुःख दूर हो जाते हैं और आत्मा परमात्मा के साथ दिव्य एकत्व का अनुभव करती है।
यह भजन हमें यह भी सिखाता है कि चाहे हम ईश्वर को कृष्ण, राम, नारायण, गोविंद या विठ्ठल किसी भी नाम से पुकारें—ये सभी नाम दिव्य शक्ति से परिपूर्ण हैं और मोक्ष का द्वार खोलते हैं। यह भजन गुजरात के मंदिरों, सत्संगों और भक्ति सभाओं में अत्यंत श्रद्धा और प्रेम से गाया जाता है।
आइए, इस भजन की मधुर धुन में डूब जाएँ और भगवान श्री हरि के हजारों नामों का स्मरण करते हुए उनकी कृपा और आशीर्वाद की कामना करें।
लिरिक्स – हरि तारा छे हजार नाम
हरि तारा छे हजार नाम, कये नामे लखवी कंकोतरी;
रोज रोज बदले मुकाम, कये गामे लखवी कंकोतरी. हरि तारा०
मथुरामां मोहन तूं गोकुळ गोवाळियो;
द्वारिकानो राय रणछोड, कये नामे लखवी कंकोतरी. हरि तारा०
कोई सीताराम कहे, कोई राधेश्याम कहे;
कोई कहे नंदनो किशोर, कये नामे लखवी कंकोतरी. हरि तारा०
भक्तोनी राखी टेक, रूप धर्या ते अनेक;
अन्ते तो एकनो एक, कये नामे लखवी कंकोतरी. हरि तारा०
भक्तो तारां अपार, गणतां न आवे पार;
पहोंचे ना पूरो विचार, कये नामे लखवी कंकोतरी. हरि तारा०
नरसिंह महेतानो स्वामी शामळियो;
मीरांनो गिरधर गोपाल, कये नामे लखवी कंकोतरी. हरि तारा०


