
श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्रम् भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, जो भक्तों के जीवन से सभी संकटों और बाधाओं को दूर करते हैं।
इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से कार्यों में सफलता, बुद्धि की वृद्धि, भय से मुक्ति और जीवन में सकारात्मकता आती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से नए कार्य की शुरुआत और कठिन समय में अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
लिरिक्स – श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्रम्
प्रणम्य शिरसा देवंगौरीपुत्रं विनायकम्।
भक्तावासं स्मेरनित्यमाय्ःकामार्थसिद्धये॥ १ ॥
प्रथमं वक्रतुण्डं चएकदन्तं द्वितीयकम्।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षंगजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥ २ ॥
लम्बोदरं पञ्चमं चषष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजं चधूम्रवर्णं तथाष्टकम् ॥ ३ ॥
नवमं भालचन्द्रं चदशमं तु विनायकम।
एकादशं गणपतिंद्वादशं तु गजाननम ॥ ४ ॥
द्वादशैतानि नामानित्रिसन्ध्यं य: पठेन्नर:।
न च विघ्नभयं तस्यसर्वासिद्धिकरं प्रभो ॥ ५ ॥
विद्यार्थी लभते विद्यांधनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभतेपुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥ ६ ॥
जपेद्गणपतिस्तोत्रंषड्भिर्मासै: फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं चलभते नात्र संशय: ॥ ७ ॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्चलिखित्वां य: समर्पयेत्।
तस्य विद्या भवेत्सर्वागणेशस्य प्रसादत: ॥ ८ ॥


