
“विठ्ठल विठ्ठल विठ्ठला हरि ॐ विठ्ठला” भगवान विठोबा (पंढरपुर के श्री विठ्ठल) की भक्ति को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय गुजराती भजन है। यह भजन गुजरात और महाराष्ट्र में अत्यंत प्रिय है और विशेष रूप से सत्संगों, भजन सभाओं और कीर्तनों में गाया जाता है।
भगवान विठ्ठल, जिन्हें विठोबा या पाण्डुरंग भी कहा जाता है, भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की अभिव्यक्ति माने जाते हैं। उनका रूप सावले यौवन पुरुष का है, जो ईंट पर खड़े होकर कमर पर दोनों हाथ रखते हैं, और उनकी साथ अक्सर पत्नी रुक्मिणी भी दिखाई देती हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त उनके नाम का जप करते हैं, हृदय में प्रेम और श्रद्धा उत्पन्न करते हैं, और आध्यात्मिक आनंद का अनुभव करते हैं।
यह भजन संत परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है और विशेष रूप से महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के भक्तों द्वारा गाया जाता है। संत तुकाराम, संत नामदेव और संत ज्ञानेश्वर जैसे महान संतों ने अपने अभंगों और कीर्तनों के माध्यम से भगवान विठ्ठल की भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया। “विठ्ठल विठ्ठल विठ्ठला हरि ॐ विठ्ठला” भी इसी भक्तिमार्ग का एक सुंदर उदाहरण है, जो भगवान विठ्ठल के प्रति अटूट विश्वास और प्रेम को अभिव्यक्त करता है।
गुजरात में भगवान श्रीकृष्ण को दिव्य प्रेम और भक्ति के प्रतीक रूप में विशेष रूप से पूजा जाता है, और श्री विठ्ठल को श्रीकृष्ण का ही एक दिव्य स्वरूप माना जाता है। इस भजन में “हरि ॐ विठ्ठला” का जाप भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है और उनके हृदय को दिव्य आनंद से भर देता है।
महाराष्ट्र में पंढरपुर की वारी यात्रा के दौरान लाखों वारकरी भक्त पंढरपुर की ओर बढ़ते हुए “विठ्ठल विठ्ठल विठ्ठला हरि ॐ विठ्ठला” का निरंतर जाप करते हैं। वहीं गुजरात में यह भजन गरबा, सत्संगों और मंदिरों में अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है। वार्षिक उत्सवों और विशेष रूप से एकादशी के अवसर पर भक्त भगवान विठ्ठल का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस भजन का गायन करते हैं।
आइए, इस मधुर भजन की धुन में स्वयं को डुबो दें और भगवान विठ्ठल के दिव्य प्रेम और कृपा का अनुभव करें।
पौराणिक कथा
पुंडलिक की कथा – कैसे भगवान विठ्ठल पंढरपुर में आए
छठी शताब्दी में महाराष्ट्र के पंढरपुर में पुंडलिक नामक एक भक्त जन्मे। पुंडलिक अपने माता-पिता और अपने इष्टदेव श्रीकृष्ण के प्रति अत्यंत भाव रखते थे। वे सरल, भक्ति भाव से पूर्ण और मधुर स्वभाव के व्यक्ति थे।
एक दिन भगवान श्रीकृष्ण अपनी पत्नी रुक्मिणी के साथ पुण्डलिक के दर्शन करने पृथ्वी पर आए। पुंडलिक अपने पिता की सेवा में व्यस्त थे और उन्होंने भगवान से कहा, “हे नाथ! मैं अभी अपने पिताजी की सेवा में लगा हूँ। कृपया आप इस ईंट पर खड़े होकर प्रतीक्षा करें।”
भगवान ने भक्त की आज्ञा का पालन किया और कमर पर दोनों हाथ रखकर, एक ईंट पर खड़े हो गए और साथ ही रुक्मिणी जी भी ईंट पर ही खड़े होकर प्रतीक्षा करनी लगीं।
जब पुंडलिक ने माता-पिता की सेवा पूरी की, तब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा और पाया कि भगवान मूर्ति रूप में विराजमान हो गए हैं। तभी से उन्हें विठ्ठल कहा गया।
संत नामदेव और विट्ठल का दूध प्रसंग
एक दिन संत नामदेव के माता-पिता किसी कार्यवश अन्य गाँव गए और उन्होंने नामदेव से कहा कि वे घर पर रहें, सबसे पहले विठ्ठल भगवान को दूध का भोग लगाएँ, फिर स्वयं भोजन करें। यदि ऐसा नहीं किया, तो भगवान नाराज होंगे।
नामदेव ने प्रतिदिन स्नान करके, साफ वस्त्र पहनकर कटोरा भर दूध मूर्ति के सामने रखा और प्रार्थना की, “हे विठ्ठल! कृपा कर इसे पी लो।” पर भगवान ने तीन दिन तक दूध नहीं पीया। भक्त ने भी भोजन नहीं किया। उसे नहीं पता था कि माता-पिता दूध को थोड़ी देर रखने के बाद अन्य दूध में मिला देते थे।
चौथे दिन नामदेव ने दूध गर्म करके रखा और कमजोरी से गिर पड़ा। इसी समय मूर्ति के हाथ आगे बढ़े और उन्होंने कटोरा उठाकर सारा दूध पी लिया। नामदेव अत्यंत प्रसन्न हुआ और स्वयं भी भोजन किया। उसके बाद विठ्ठल प्रतिदिन दूध पीने लगे।
जब माता-पिता लौटे, उन्होंने पूछा कि क्या बिठ्ठल जी को दूध का भोग लगाया? नामदेव ने पूरी सच्चाई बताई। माता-पिता चकित रह गए। पिताजी ने कहा कि कल सुबह हमारे सामने दूध पिलाना।
पंढरपुर का विठोबा मन्दिर – श्री विठ्ठल रुक्मिणी मंदिर
विठोबा मन्दिर, जिसे श्री विठ्ठल रुक्मिणी मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है, महाराष्ट्र के सोलापुर ज़िले के पंढरपुर नगर में स्थित एक प्रमुख और ऐतिहासिक हिन्दू मन्दिर है। यह मन्दिर भगवान विठ्ठल (भगवान विष्णु का रूप) और उनकी पत्नी रुक्मिणी को समर्पित है।
यह मन्दिर महाराष्ट्र के सबसे अधिक श्रद्धालुओं वाले मन्दिरों में से एक माना जाता है। यहाँ आने वाले भक्त पवित्र भीमा नदी में स्नान करके अपनी भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
भजन के लाभ
भगवान विठ्ठल का नाम जप करने से हृदय में शांति और आनंद का अनुभव होता है। यह भजन भक्तों के मन में सच्ची भक्ति और श्रद्धा उत्पन्न करता है। मानसिक तनाव कम होता है और भगवान के प्रति आत्मीय संबंध बढ़ता है।
लिरिक्स – विठ्ठल विठ्ठल विठ्ठला हरि ॐ विठ्ठला
विठ्ठल विठ्ठल विठ्ठला हरि ॐ विठ्ठला (२)
कौने कौने दिठेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
विठ्ठल विठ्ठल…
गोकुळ माँ आवेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
नंदबाबा ए दिठेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
विठ्ठल विठ्ठल…
मथुरा माँ आवेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
वासुदेव ए दिठेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
विठ्ठल विठ्ठल…
मेवाड़ माँ आवेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
मीराबाई ए दिठेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
विठ्ठल विठ्ठल…
जूनागढ़ माँ आवेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
नरसिंह मेहता ए दिठेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
विठ्ठल विठ्ठल…
पोरबंदर माँ आवेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
सुदामा ए दिठेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
विठ्ठल विठ्ठल…
वीरपुर माँ आवेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
जलाराम ए दिठेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
विठ्ठल विठ्ठल…
पंढरपुर माँ आवेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
पुंडरिके दिठेला पांडुरंगा विठ्ठला (२)
विठ्ठल विठ्ठल…
डाकोर गाँव माँ आवेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
भक्तों ए सहुँ दिठेला हरि ॐ विठ्ठला (२)
विठ्ठल विठ्ठल…


