
“श्री कृष्णः शरणं ममः” एक अत्यंत आध्यात्मिक और भक्तिपूर्ण गुजराती भजन है, जो भगवान श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण और अटूट विश्वास को व्यक्त करता है। यह भजन दर्शाता है कि श्रीकृष्ण का नाम केवल भक्तों के हृदय में ही नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड में गूंजता है।
इस भजन के बोल बताते हैं कि प्रकृति का हर तत्व कृष्ण-भक्ति में लीन है—कदम्ब वृक्ष की शाखाएँ, यमुना नदी के तट, पावन ब्रजभूमि, पवित्र कुंडों की सीढ़ियाँ, खिले हुए कमल, वृंदावन के वृक्ष, गोकुल की गायें, और चहचहाते पक्षी—सब उनके दिव्य नाम का जप करते हैं। यह भजन एक गहरी सीख देता है कि जब सृष्टि का प्रत्येक कण कृष्ण की अराधना में डूबा है, तो हम भी उनके चरणों में शरण लेकर शांति और आनंद प्राप्त कर सकते हैं।
“श्री कृष्णः शरणं ममः” का अर्थ है—“मैं भगवान कृष्ण की शरण में हूँ।”
यह पूर्ण भक्ति, समर्पण और दिव्य संरक्षण का प्रतीक है। श्रीकृष्ण की शरण में जाने से जीवन के दुख दूर हो जाते हैं और ह्रदय प्रेम, शांति और आनंद से भर जाता है।
इस भजन को सुनना और गाना मन और आत्मा को पवित्र करता है, हृदय में दिव्य प्रेम जगाता है, और भगवान कृष्ण की अनंत कृपा से हमारा संबंध गहरा करता है।
लिरिक्स – श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
कदंब केरी डाळो बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
जमुना केरी पालो बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
व्रज चौरासी कोस बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
कुंड कुंडनी सीढ़ीयां बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
कमल कमल पर मधुकर बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
डाल डाल पर पक्षी बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
वृंदावननाँ वृक्षो बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
गोकुलियानी गायों बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
कुंज कुंज वन उपवन बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
व्रजभूमिना रजकण बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
रास रमन्ति गोपी बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
धेनु चरावता गोपो बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
वाज़ा ने तबलामा बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
शहनाई ने तंबूरमा बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
नृत्य करंती नारी बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
केसर केरी क्यारी बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
आकाशे पाताले बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
चौदह लोक ब्रहमांडे बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
चंद्र सरोवर चौके बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
पत्र पत्र शाखाएँ बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
आंबो नींबू ने जाम्बु बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
वनस्पति हरियाली बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
जतीपुराना लोको बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
मथुराजी ना चौबा बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
गोवर्धन ने शिख़रे बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
गली गली गहवरवन बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
वेणु स्वर संगीते बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
कला करंता मोर बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
पुलिन कंदरा मधुवन बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री जमुनाजीनी लहरों बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
आंबा डालें कोयल बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
तुलसी जी ना क्यारा बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
सर्व जगतमाँ व्यापक बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
विरही जनना हैया बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
कृष्ण वियोगे आतुर बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
वल्लभी वैष्णव सर्वे बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
मधुर वीणा वाजिंत्रों बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
कुमुदिनी सरोवरमाँ बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
चंद्र सूर्य आकाशे बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
तारलियाना मंडल बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
अष्ट प्रहर आनंदे बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
रोम रोम व्याकुल थय बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
महामंत्र मनमाहैं बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
जुगल चरण अनुरागे बोले, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः
श्री कृष्णः शरणं ममः, श्री कृष्णः शरणं ममः


